Saturday, May 9, 2015

जानिए मां बगलामुखी की कथा



देवी बगलामुखी जी के संदर्भ में एक कथा बहुत प्रचलित है जिसके अनुसार एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच जाता है और अनेकों लोक संकट में पड़ गए और संसार की रक्षा करना असंभव हो गया. यह तूफान सब कुछ नष्ट भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था, जिसे देख कर भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए.
इस समस्या का कोई हल न पा कर वह भगवान शिव को स्मरण करने लगे तब भगवान शिव उनसे कहते हैं कि शक्ति के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता अत: आप उनकी शरण में जाएँ, तब भगवान विष्णु ने हरिद्रा सरोवर के निकट पहुँच कर कठोर तप करते हैं. भगवान विष्णु ने तप करके महात्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न किया देवी शक्ति उनकी साधना से प्रसन्न हुई और सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील में जलक्रीडा करती महापीत देवी के हृदय से दिव्य तेज उत्पन्न हुआ।
उस समय चतुर्दशी की रात्रि को देवी बगलामुखी के रूप में प्रकट हुई, त्र्येलोक्य स्तम्भिनी महाविद्या भगवती बगलामुखी नें प्रसन्न हो कर विष्णु जी को इच्छित वर दिया और तब सृष्टि का विनाश रूक सका. देवी बगलामुखी को बीर रति भी कहा जाता है क्योंकि देवी स्वम ब्रह्मास्त्र रूपिणी हैं, इनके शिव को एकवक्त्र महारुद्र कहा जाता है इसी लिए देवी सिद्ध विद्या हैं. तांत्रिक इन्हें स्तंभन की देवी मानते हैं, गृहस्थों के लिए देवी समस्त प्रकार के संशयों का शमन करने वाली हैं.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पंडित "विशाल' दयानंद शास्त्री के अनुसार बगलामुखी आराधना में निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। साधना में पीत वस्त्र धारण करना चाहिए एवं पीत वस्त्र का ही आसन लेना चाहिए। आराधना में पूजा की सभी वस्तुएं पीले रंग की होनी चाहिए। आराधना खुले आकश के नीचे नहीं करनी चाहिए।
आराधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए । साधना डरपोक किस्म के लोगों को नहीं करनी चाहिए। बगलामुखी देवी अपने साधक की परीक्षा भी लेती हैं। साधना काल में भयानक अवाजें या आभास हो सकते हैं, इससे घबराना नहीं चाहिए और अपनी साधना जारी रखनी चाहिए।
साधना गुरु की आज्ञा लेकर ही करनी चाहिए और शुरू करने से पहले गुरु का ध्यान और पूजन अवश्य करना चाहिए। बगलामुखी के भैरव मृत्युंजय हैं, इसलिए साधना के पूर्व महामृत्युंजय मंत्र का एक माला जप अवश्य करना चाहिए। साधना उत्तर की ओर मुंह करके करनी चाहिए। मंत्र का जप हल्दी की माला से करना चाहिए। जप के पश्चात् माला अपने गले में धारण करें।
साधना रात्रि में 9 बजे से 12 बजे के बीच प्रारंभ करनी चाहिए। मंत्र के जप की संखया निर्धारित होनी चाहिए और रोज उसी संखया से जप करना चाहिए। यह संखया साधक को स्वयं तय करना चाहिए।
साधना गुप्त रूप से होनी चाहिए। साधना काल में दीप अवश्य जलाया जाना चाहिए। जो जातक इस बगलामुखी साधना को पूर्ण कर लेता है, वह अजेय हो जाता है, उसके शत्रु उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाते।
SOURCE - naidunia.jagran

कार्य सिद्धि 'हनुमान मंत्र'


देखें कार्य सिद्धि हनुमान मंत्र, इस मंत्र का जाप करने से आपके सभी कार्य और मनोरथ सिद्ध होते है

Source - jagran

भगवान तुंगनाथ के खुले कपाट



भगवान तुंगनाथ के खुले कपाट
रुद्रप्रयाग। मध्य हिमालय स्थित तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को पारंपरिक रीति रिवाज और भोलेनाथ के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। अब आगामी छह माह तक भगवान तुंगनाथ की यहीं पूजा अर्चना की जाएगी।
गुरुवार रात्रि दूसरे पड़ाव चोपता में रात्रि विश्राम करने के पश्चात शुक्रवार की सुबह भगवान तुंगनाथ की विशेष पूजा अर्चना की गई। तत्पश्चात करीब आठ बजे डोली ने तुंगनाथ की ओर प्रस्थान किया। उत्सव डोली करीब 11 बजे मंदिर परिसर पहुंची। यहां भक्तों ने शिव के जयकारों के साथ उत्सव डोली का स्वागत किया। मंदिर समिति के कर्मचारी व हक हकूकधारियों की मौजूदगी में 11.30 बजे शुभ मुर्हुत कर्क लग्न में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसके पश्चात उत्सव डोली से पंचकेदार, पार्वती व भूतनाथ की मूर्तियों को उतार कर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर तुंगनाथ की पूजा अर्चना की गई। कपाट खुलने के दिन स्थानीय व दूर दराज क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु भगवान तुंगनाथ के दर्शनों के लिए उमड़ पड़े।
तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव के ह्दय व बाहु के दर्शन किए जाते हैं। इस मौके पर मंदिर समिति के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, मठापति रामप्रसाद मैठाणी, रविन्द्र मैठाणी, महेशानंद मैठाणी, मुकेश मैठाणी, जीतपाल सिंह भंडारी सुरेन्द्र मैठाणी समेत भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
Source - jagran.

Sunday, May 3, 2015

मई के पहले दिन कौनसे शुभ संयोग संवारेंगे आपके काम

1 मई 2015 को शुक्रवार है। शुभ वि.सं.- 2072, संवत्सर नाम- कीलक, अयन- उत्तर, शाके- 1937, हिजरी- 1436, मु. मास- रज्जब-11, ऋतु- ग्रीष्म, मास- वैशाख, पक्ष- शुक्ल है।
शुभ तिथि
त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि सम्पूर्ण दिवारात्रि रहेगी। त्रयोदशी तिथि में जनेऊ को छोड़कर समस्त शुभ व मंगल कार्य यथा- विवाह, वास्तु-गृहारम्भ, गृहप्रवेश, यात्रा, प्रतिष्ठा, युद्ध, वस्त्रालंकार धारण तथा अन्य उत्सवादि शुभ कहे गए हैं।
जरूर पढ़िए- हार को भी जीत में बदल सकते हैं चाणक्य के ये 9 मंत्र
त्रयोदशी तिथि में जन्मा जातक सामान्यतः धनवान, विद्यावान, पराक्रमी, परोपकारी, बुद्धिमान, योग्य, राज-समाज में मान-सम्मान पाने वाले तथा शास्त्रविज्ञ होता है।
नक्षत्र
हस्त नक्षत्र सम्पूर्ण दिवारात्रि रहेगा। हस्त नक्षत्र में यात्रा, विद्या, विवाहादि मांगलिक कार्य, अलंकार, वस्त्र, औषध, गृहारम्भ, प्रवेश, प्रतिष्ठा तथा अन्य मांगलिक कार्यादि शुभ होते हैं। हस्त नक्षत्र में जन्मा जातक सामान्यतः मेधावी, उत्साही, परोपकारी, शूरवीर, भाग्यशाली, सम्मानित, सुखी और अपने समाज को नेतृत्व देने वाला होता है।
कोई जातक क्रोधी, निर्दयी, अशुभकर्मी, कलहप्रद वातावरण रखने वाला भी होता है। ये दुर्गुण किसी-किसी जातक में किसी पाप योग के प्रभाव से उत्पन्न हो जाते हैं। इनका भाग्योदय लगभग 30-32 वर्ष की आयु तक होता है।
योग
हर्षण नामक नैसर्गिक शुभ योग रात्रि 11.13 तक, तदन्तर वज्र नामक नैसर्गिक अशुभ योग रहेगा। वज्र नामक योग की प्रथम तीन घटी शुभ कार्यों में त्याज्य हैं।
करण
कौलव नामकरण सायं 5.13 तक, तदन्तर तैतिलादि करण रहेंगे।
चंद्रमा
चंद्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि कन्या राशि में रहेगा।
व्रतोत्सव
कल प्रदोष व्रत और विश्व मजदूर दिवस है।
शुभ कार्यों के मुहूर्त
उक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार शुक्रवार को विवाह (केतुवेध व ग्रहणम् दोषयुक्त अति आवश्यकता में), गृहारम्भ अशुद्ध (केतुवेध), गृहप्रवेश, वधु-प्रवेश, द्विरागमन, प्रसूतिस्नान, विद्यारम्भ, कर्णवेध, नामकरण, अन्नप्राशन, कूपारम्भ, चूड़ाकरण, हलप्रवहण व विपणि-व्यापारारम्भ आदि के हस्त नक्षत्र में शुभ मुहूर्त हैं।
वारकृत्य कार्य
शुक्रवार को सामान्यतः नृत्य-वाद्य-गीत-कलारम्भ, सांसर्गिक कार्य, धन व भूमि सम्बंधी कार्य, नवीन वस्त्राभूषण धारण, मनोरंजन के कार्य और कृषि सम्बंधी समस्त कार्य शुभ रहते हैं।
दिशाशूल
शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चंद्र स्थिति के अनुसार दक्षिण दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद रहेगी।
Source - rajasthanpatrika