Jul 12, 2015

"पापा ये कैसे.........

एक गिद्ध का बच्चा अपने बाप से बोला "पापा आज मुझे
इनसान का
गोशत खाना हैं । गि द्ध बोला " ठीक हैं बेटा शाम को
ला दुगा। गिद्ध उडा ओर एक सुअर का गोशत ले कर आया।
गिद्ध का
बच्चा बोला "पापा ये तो सुअर का गोशत है ,
मुझे तो इनसान का गोशत खाना हैं । गिद्ध बोला " रूक शाम
तक मिल
जाऐगा । गिद्ध फिर उडा ओर एक मरी गाय का गोशत ले
कर आया । गिद्ध का बच्चा बोला "पापा ये तो गाय का
गोशत है , मुझे
तो इनसान का गोशत खाना हैं । गिद्ध उडा ओर उसने सुअर का
गोशत
एक मसजिद के आसपास और गाय का गोशत मंदिर
के पास फेक दिया। थोडी देर के बाद वहाँ ढेर
सारी इनसानो की लाशे बिछ गई । बाप बेटो ने
जम के इनसानो का गोशत खाया । गिद्ध का बच्चा बोला
"पापा ये कैसे
हुआ,इतना सारा गोशत " गिद्ध बोला "बेटा ये इनसान है हि
ऐसा ,
धॆम॔ के नाम पर इसे "जानवर"
से भी बदतर बानाया जा सकता है। और ये काम इन
इनसानो में बैठे कई गिद्ध कर रहे है । आज हम ने कर
दिया...........|

Jul 7, 2015

अरी तूने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया



एक दिन पंडित को प्यास लगी, संयोगवश घर में पानी नही था इसलिए उसकी पत्नी पडोस से पानी ले आई,  पानी पीकर पंडित ने पूछा....

पंडित - कहाँ से लायी हो बहुत ठंडा पानी है I

पत्नी - पडोस के कुम्हार के घर से ,
 (पंडित ने यह सुनकर लोटा फैंक दिया और उसके तेवर चढ़ गए वह जोर जोर से चीखने लगा )

पंडित - अरी तूने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया, कुंभार ( शुद्र ) के घर का पानी पिला दिया। पत्नी भय से थर-थर कांपने लगी, उसने पण्डित से माफ़ी मांग ली
पत्नी - अब ऐसी भूल नही होगी। शाम को पण्डित जब खाना खाने बैठा तो घरमे खानेके लिए कुछ नहीं था.

पंडित - रोटी नहीं बनाई. भाजी
नहीं बनाई.

पत्नी - बनायी तो थी लेकिन अनाज पैदा करनेवाला कुणबी(शुद्र) था. और जिस कढ़ाई में बनाया था वो लोहार (शुद्र) के घर से आई थी। सब फेक दिया.

पण्डित - तू पगली है क्या कही अनाज और कढ़ाई में भी छुत होती है? यह कह कर पण्डित बोला की पानी तो ले आओ I

पत्नी - पानी तो नही है जीI

पण्डित - घड़े कहाँ गए हैI

पत्नी - वो तो मेने फैंक दिए क्योंकि कुम्हार के हाथ से बने थेI पंडित बोला दूध ही ले आओ वही पीलूँगा I
पत्नी - दूध भी फैंक दिया जी क्योंकि गाय को जिस नौकर ने दुहा था वो तो नीची (शुद्र) जाति से था न I

पंडित- हद कर दी तूने तो यह भी नही जानती की दूध में छूत नही लगती है I

पत्नी-यह कैसी छूत है जी जो पानी में तो लगती है, परन्तु दूध में नही लगती। पंडित के मन में आया कि दीवार से सर फोड़ ले। गुर्रा कर बोला - तूने मुझे चौपट कर दिया है जा अब आंगन में खाट डाल दे मुझे अब नींद आ रही है I

पत्नी- खाट! उसे तो मैने तोड़ कर फैंक दिया है क्योंकि उसे शुद्र (सुतार ) जात वाले ने बनाया था.

पंडित चीखा - ओ फुलो का हार लाओ भगवन को चढ़ाऊंगा ताकि तेरी अक्ल ठिकाने आये.

पत्नी- फेक दिया उसे माली(शुद्र) जाती ने बनाया था.

पंडित चीखा- सब में आग लगा दो, घर में कुछ बचा भी हैं या नहीं.
पत्नी - हाँ यह घर बचा है, इसे अभी तोडना बाकी है क्योंकि इसे भी तो पिछड़ी जाति के मजदूरों ने बनाया है I पंडित के पास कोई जबाब नही था .

उसकी अक्ल तो ठिकाने आयी बाकी लोगोकी भी आ जायेगी सिर्फ
इस कहानी आगे फॉरवर्ड करो हो सके देश मे जाती वाद खत्म हो जाये

Jul 6, 2015